Friday, 22 November 2013

आत्महत्या के उपाय ****अगर आप मरना चाहते हैं ................



आत्महत्या के उपाय ****अगर आप मरना चाहते हैं परन्तु आप मरने हेतु कुछ लेटेस्ट कारण व तरीके अपनाने के शौक़ीन हैं
तो इन्हें अपनाए .................

# अपने लैपटॉप में Win-XP ऑपरेटिंग सिस्टम
डाले , BSNL का ब्रोड्बैंड लगाए और इन्टरनेट
एक्स्प्लोरर ब्राउज़र पर IRCTC वेबसाइट पर
तत्काल टिकट बुक करने का प्रयास करे , यकीन
मानिए आप आत्महत्या कर लेंगे |

# किसी म्यूजिक स्टोर से जाके अनु मालिक व
अल्ताफ राजा के गानों की CD ले आइये और
उन्हें रात भर एक बंद कमरे में बैठ कर लगातार सुने ,
100% गारंटी सवेरे आपकी लाश मिलेगी |

# संडे के दिन आराम से घर में बैठ कर सवेरे 9 बजे से शाम के 5 बजे तक सोनी टीवी पर नॉनस्टॉप
दिखाया जाने वाला शो "CID" देखे , सोमवार
को आपके जनाजे में हम भी शिरकत करेंगे |

# अगर आप तड़प तड़प कर मरना चाहते हैं
तो इन्टरनेट से दिग्विजय सिंह के सभी भाषणों को डाउनलोड कीजिये और रोज रात कोई एक भाषण सुनिए , कसम दिग्गी राजा की आप तड़प तड़प के मरेंगे |

# अगर आप हँस हँस के मरना चाहते हैं तो आप
दो दिन लगातार बैठ कर राहुल गाँधी जी की स्पीच नॉनस्टॉप सुनते जाए , और मरते समय जय पप्पू राज का नारा लगाना ना भूले |

# अगर आप झल्लाहट से मरना छाते हैं तो बाज़ार
जाके दीपक तिजोरी,आदित्य पंचोली,राहुल रॉय व उदय चोपड़ा अभिनीत फिल्मो की DVD ले आइये और खुद को एक कुर्सी पर रस्सी से बांध कर फिल्मे देखे |आपकी जान निकल जायेगी |

# गुमनामी की मौत चाहते हैं तो " दिग्विजय
सिंह को इंसान " व " राहुल को बुद्धिमान "
साबित करने के लिए खोज व रिसर्च करना शुरू
कर दे |

Wednesday, 23 October 2013

याद आते है अब वो पुराने दिन ...................

आज बस ऐसे ही जब खाली बैठा था तो सोचा की क्यों ना अपनी ईमेल के इनबॉक्स को कम करते है ज्यादा मैसेज है ऐसे ही बैठे बैठे जब पूरा इनबॉक्स खंगाला निकल आई कुछ पुरानी यादे कुछ पुरानी तस्वीरे जब हमने यहाँ कालेज में दाखिला लिया था , जब यहाँ हमने अपने दोस्त बनाये थे और बानाए थे उनके कुछ ईमेल अकाउंट , जब हम दूसरे की मेल आईडीस देखा करते थे जब एक दूसरे को हम मैसेज किया करते थे जब कुछ नहीं जानते थे और सब जानने की ललक थी , जब ज़रा ज़रा सी बातो पर लड़ा करते थे , जब एक दूसरे की चुगली करते थे सब याद आ गया वो साथ वो नया पन वो अपनापन एक दूसरे की शक्ले और एक दूसरे की बाते ।
अब भी याद आता है वो यारो के साथ का घूमना एक दूसरे के घर का खाना और क्लास छोड़ कर घूमने जाना
पर अब तो सब बड़े ही गए है अब किसी को वक्त नहीं है बस अपने ही काम मव व्यस्त है बस अब तो सब सोचते है कि आयेंगे तो ऐसे वक्त बिताएंगे पुराने दिनों की तरह घूमने चलेंगे पर सब बाते है और जो रह गयी है वो बस यादे है ।
बस उन पलो की याद आ गई पर अब मिटा दिया मैने उ यादो को अपने इनबॉक्स से पर नही मिटा पाया तो अपने दिल और दिमाग से ।

सच में
I MISS THOSE OLD DAYS


Tuesday, 22 October 2013

तो हम निठल्ले क्यों बैठे है।

जब  लोहे का काम करके कोई टाटा , और
जूते का काम कर के बाटा बन सकता है
तो हम निठल्ले क्यों बैठे है।



Wednesday, 17 April 2013

ज़िन्दगी की कशमकश ........

ज़िन्दगी  की कशमकश में कुछ इस कदर खोया की खुद को ही भूल गया .......
रहते  बाकी पन्नों में बस उसी के निशाँ है ,
 को पार कर के पहुंचा हूँ जिस साहिल पर बिना माझी के ,
उस मंजिल का दीदार अभी बाक़ी है