ज़िन्दगी की कशमकश में कुछ इस कदर खोया की खुद को ही भूल गया .......
रहते बाकी पन्नों में बस उसी के निशाँ है ,
को पार कर के पहुंचा हूँ जिस साहिल पर बिना माझी के ,
उस मंजिल का दीदार अभी बाक़ी है
रहते बाकी पन्नों में बस उसी के निशाँ है ,
को पार कर के पहुंचा हूँ जिस साहिल पर बिना माझी के ,
उस मंजिल का दीदार अभी बाक़ी है
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