Wednesday, 9 April 2014

नेता जी हमारा क्या होगा

सड़क पर निकलते हुए नेता जी के काफिले को देख कर भिखारिन का बच्चा मा से कहता है कि माँ सुना कि इस पर 'वो' आ रहे है और बगल कि दूकान पर कोई कह रहा था कि वो बहुत अच्छे है।  बच्चे को मा समझाते हुए कहती है कि बेटा 'वो आये या ये'  हमारी किस्मत तो यही है कि सुबह होते ही खाने के  दो निवाले के दर दर हाथ  फैलाने है हम भी सोचते थे कि इस बार कोई नेता आएगा और कहेगा कि अब तुम्हे सड़क किनारे बैठ कर अब भीख नहीं मांगनी पड़ेगी चलो तुम्हारे लिए रोजगार कि व्यवस्था हो गयी है अब तुम कभी भूखे पेट  नहीं सोया करोगी और न ही तुम्हारे बच्चे।  वो अब स्कूल जायेंगे और तुम सब अपने घर में सोया करोगी ना कि इस खुले आसमान में।  अब तुम्हारे बच्चे किसी का मुह नहीं ताकेंगे और न ही किसी से मार खायेंगे और न ही किसी ढाबे में बरतन धोएंगे और न ही किसी कि झूठन खायेंगे। वो भी अब सभी बच्चो की ही तरह स्कूल जायेंगे और पढ़ लिख कर देश का नाम ऊंचा करेंगे।  तुम भी देश के नागरिक हो पर क्या करे बेटा लगता है हमें तो श्रापित की तरह ही दुनिया देखती है हम भी नहीं चाहते कि भीख मांगे पर क्या करे बाबू पापी पेट का जो सवाल है  अपनी किस्मत में यही है लगता है हैम यहाँ के नागरिक ही  नहीं है तभी तो शायद किसी नेता जी का ध्यान नहीं जाता
 चल बेटा सड़क पार करते है वरना आज भी एक वक्त का ही खाना मिल पायेगा

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