Wednesday, 23 October 2013

याद आते है अब वो पुराने दिन ...................

आज बस ऐसे ही जब खाली बैठा था तो सोचा की क्यों ना अपनी ईमेल के इनबॉक्स को कम करते है ज्यादा मैसेज है ऐसे ही बैठे बैठे जब पूरा इनबॉक्स खंगाला निकल आई कुछ पुरानी यादे कुछ पुरानी तस्वीरे जब हमने यहाँ कालेज में दाखिला लिया था , जब यहाँ हमने अपने दोस्त बनाये थे और बानाए थे उनके कुछ ईमेल अकाउंट , जब हम दूसरे की मेल आईडीस देखा करते थे जब एक दूसरे को हम मैसेज किया करते थे जब कुछ नहीं जानते थे और सब जानने की ललक थी , जब ज़रा ज़रा सी बातो पर लड़ा करते थे , जब एक दूसरे की चुगली करते थे सब याद आ गया वो साथ वो नया पन वो अपनापन एक दूसरे की शक्ले और एक दूसरे की बाते ।
अब भी याद आता है वो यारो के साथ का घूमना एक दूसरे के घर का खाना और क्लास छोड़ कर घूमने जाना
पर अब तो सब बड़े ही गए है अब किसी को वक्त नहीं है बस अपने ही काम मव व्यस्त है बस अब तो सब सोचते है कि आयेंगे तो ऐसे वक्त बिताएंगे पुराने दिनों की तरह घूमने चलेंगे पर सब बाते है और जो रह गयी है वो बस यादे है ।
बस उन पलो की याद आ गई पर अब मिटा दिया मैने उ यादो को अपने इनबॉक्स से पर नही मिटा पाया तो अपने दिल और दिमाग से ।

सच में
I MISS THOSE OLD DAYS


Tuesday, 22 October 2013

तो हम निठल्ले क्यों बैठे है।

जब  लोहे का काम करके कोई टाटा , और
जूते का काम कर के बाटा बन सकता है
तो हम निठल्ले क्यों बैठे है।



Wednesday, 17 April 2013

ज़िन्दगी की कशमकश ........

ज़िन्दगी  की कशमकश में कुछ इस कदर खोया की खुद को ही भूल गया .......
रहते  बाकी पन्नों में बस उसी के निशाँ है ,
 को पार कर के पहुंचा हूँ जिस साहिल पर बिना माझी के ,
उस मंजिल का दीदार अभी बाक़ी है


Friday, 21 December 2012

कुछ समझ आता नहीं


अब क्या लिखूं कुछ नहीं समझ आता है
उसके दर्द के आगे अपना हाल बयान  कर पाना मुश्किल है
उसकी आवाज की आहट  में छुपा है दर्द इतना की उसे समझ पाना  मुश्किल है
क्यूँ हम बेबस है हालत के आगे कुछ दिखा पाना मुश्किल है ............

अभी कुछ बाक़ी है ........


 

इक दर्द की दास्तान अभी बाकी है ,
कुछ राज अभी दिल में छुपाना अभी  बाकी है ।
 वैसे हर रोज मिलती है  वो सपनों में ,
पर उसका सामने आना अभी बाकी है ।
हर वक्त उसकी यादो को दिल में सजाना बाकी है ,
ज़िन्दगी में उसका आकर चले जाना अभी बाकी है  ।
वो उसका शरमा कर चला जाना याद है मुझे ,
अभी उसका बिना कुछ कहे वापस जाना बाकी है  ।
वैसे   तो हर चीज ले गयी संग अपने पर,
 मेरे हथेली  पर उसके हाथो के निशाँ बाक़ी है  ।

Sunday, 16 December 2012

दौलत शोहरत क्या करनी ...........

दौलत  शोहरत क्या करनी
 तेरे प्यार का सहारा काफी है।
 मुझे महल अटारी क्या करना
 तेरे दिल में गुजारा काफी है।

मेरे सनम मुझे तेरी कसम
मेरी जान भी तू इमान भी तू ,
तेरे दम से है  मेरा दम
जान भी तू अनजान भी तू !
मुझे पैसा वैसा क्या करना मुझे
तेरा नज़ारा  काफी है।

प्यार मोहब्बत से दुनिया
इससे बढ़ कुछ होता भी नहीं ,
दौलत जाए तो जाए कोई,
प्यार बिना रोज़ा भी नहीं।
मुझे ऐशो मशर्रत नहीं चाहिए 
मुझे ऐशो मशर्रत नहीं चाहिए
मुझे तेरा सहारा काफी है,
दौलत  शोहरत क्या करनी............